देहरादून। उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और देश-विदेश की कला परंपराओं को एक मंच पर लाने वाला विश्वविख्यात विरासत कला एवं धरोहर महोत्सव इस बार नए और भव्य परिसर में आयोजित होगा। २३ अक्टूबर से ६ नवंबर तक चलने वाला १५ दिवसीय विरासत महोत्सव नींबूवाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में सजेगा। रिच संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष आरके सिंह ने कहा कि इस बार महोत्सव को और भव्य बनाने के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
राजपुर रोड स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए आरके सिंह ने बताया कि नए आयोजन स्थल का चयन दर्शकों को बेहतर अनुभव देने और यातायात संबंधी परेशानियों को कम करने के उद्देश्य से किया गया है। महोत्सव के दौरान सभागार में २९ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही पहली बार रंगमंच महोत्सव भी शुरू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना संस्था का लक्ष्य है।
महोत्सव का शुभारंभ छोलिया नृत्य और उप्रेती बहनों की लोक संगीत प्रस्तुति से होगा। उद्घाटन समारोह में प्रसिद्ध ठुमरी गायक पंडित साजन मिश्रा और स्वरांश मिश्रा हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति देंगे। वहीं, ६ नवंबर को अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त गायिका ऊषा उत्थुप की प्रस्तुति के साथ महोत्सव का समापन होगा।
लोक संस्कृति से शास्त्रीय संगीत तक सजेगी महफिल
१५ दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में उत्तराखंड की लोक परंपराओं के साथ देश-विदेश की संगीत और नृत्य विधाओं का संगम देखने को मिलेगा। जौनसारी, गढ़वाली और कुमाऊंनी लोक नृत्य-संगीत के साथ लोक नाट्य ‘चक्रव्यूह’ प्रमुख आकर्षण रहेगा। श्रीलंका और कजाकिस्तान के कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में बेगम परवीन सुल्ताना, टीएम कृष्णा और डॉ. एन. राजम जैसे प्रतिष्ठित कलाकार कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। युवा वायलिन वादक रागिनी शंकर, सरोद वादक स्मित तिवारी, बांसुरी वादक अश्विन श्रीनिवासन और सितार वादक ध्रुव बेदी व समन्वय सरकार भी प्रस्तुतियां देंगे। इसके अलावा ओसमान मीर, ‘इंडियन ओशन’ बैंड, महेश काले, राहुल देशपांडे और जसबीर जस्सी सहित कई कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
कथक, भरतनाट्यम और ओडिसी नृत्य की प्रस्तुतियों के साथ वीणा वादन, ठुमरी, गजल और सूफी संगीत भी दर्शकों को सुनने को मिलेगा। भारतीय और पश्चिमी संगीत के मेल पर आधारित विशेष कार्यक्रम में वायलिन वादक कुमारेश और सैक्सोफोन वादक जॉर्ज ब्रूक्स एक साथ प्रस्तुति देंगे। ‘बहार-ए-लखनऊ’, ‘चांदनी महफिल’ और ‘तवायफनामा’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए कला और सांस्कृतिक इतिहास के विभिन्न पहलुओं को सामने लाया जाएगा। ग्रामोफोन के १२५ वर्ष पूरे होने के अवसर पर गौहर जान की स्मृति में भी विशेष प्रस्तुति होगी।
साहित्य, शिल्प और बच्चों के लिए भी होंगे खास आयोजन
विरासत महोत्सव में साहित्य प्रेमियों के लिए साहित्यिक कार्यक्रम, अपराध साहित्य पर विमर्श, दास्तानगोई, मुशायरा और कवि सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इनमें देश के कई प्रतिष्ठित लेखक, कवि और शायर हिस्सा लेंगे। देहरादून की साहित्यिक हस्तियां भी अपने विचार और रचनाएं प्रस्तुत करेंगी।
महोत्सव में पारंपरिक हस्तशिल्प, परिधान, लकड़ी की नक्काशी, धातु शिल्प, फर्नीचर, सूखे मेवे और अन्य कलात्मक उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री भी होगी। विरासत ग्राम और खुले रंगमंच पर लोक कलाओं की प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। स्कूली विद्यार्थियों के लिए विरासत प्रश्नोत्तरी, ‘शिल्प ट्रेजर हंट’ और शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य से जुड़े कार्यक्रम रखे जाएंगे। विंटेज कार और मोटरसाइकिल रैली, सुपरबाइक रैली तथा उत्तराखंड की पर्यावरण संबंधी लोक नाट्य प्रस्तुति भी आयोजन के आकर्षण होंगे।
आरके सिंह ने कहा कि विरासत महोत्सव उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को सम्मान देने के साथ विभिन्न देशों की कला और परंपराओं को एक मंच पर लाने का अवसर है। पत्रकार वार्ता में रिच संस्था की संयुक्त सचिव विजयश्री जोशी, महोत्सव के निदेशक लोकेश ओहरी, प्रियंदा अय्यर, संस्था के सदस्य आशुतोष, वन विभाग उत्तराखंड से समीर सिन्हा और ओएनजीसी के मानव संसाधन प्रमुख नीरज शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।