October 24, 2026 6:08 pm

राज्यपाल ढाल सिंह बिसेन ने परिवार संग किए बदरी-केदार के दर्शन, स्वच्छ और नशामुक्त देवभूमि का दिया संदेश

रुद्रप्रयाग/चमोली। उत्तराखंड के राज्यपाल ढाल सिंह बिसेन ने पद की शपथ लेने के बाद पहली बार बदरी-केदार धाम का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पहले केदारनाथ धाम पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद वह परिवार के साथ बदरीनाथ धाम पहुंचे, जहां भगवान बदरी विशाल के दर्शन कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। बदरीनाथ धाम में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

केदारनाथ धाम में राज्यपाल ने कहा कि बाबा केदारनाथ के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होना उनके लिए श्रद्धा और आस्था का विषय है। उन्होंने पवित्र देवभूमि उत्तराखंड को नमन करते हुए प्रदेश की सेवा का अवसर देने के लिए शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं। बाबा के आशीर्वाद से उत्तराखंड सहित पूरा देश सुख, शांति और समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़े, यही उनकी कामना है।

स्वच्छ और नशामुक्त देवभूमि बनाने की अपील

राज्यपाल ने देवभूमि की पवित्रता बनाए रखने और धार्मिक स्थलों की स्वच्छता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने केदारनाथ आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से यात्रा के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखने तथा प्रदेश को नशामुक्त बनाने के प्रयासों में सहयोग करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ और ‘नशामुक्त भारत’ के संकल्प को साकार करने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। देवभूमि की धार्मिक पहचान, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को सुरक्षित रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास पर जोर

इसके बाद राज्यपाल ढाल सिंह बिसेन परिवार के साथ बदरीनाथ धाम पहुंचे और भगवान बदरी विशाल के दर्शन किए। उन्होंने देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल प्राकृतिक सौंदर्य की भूमि नहीं, बल्कि देश को संस्कार, आध्यात्मिक चेतना और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत देने वाली देवभूमि भी है।

राज्यपाल ने प्रदेश की लोक संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने और प्राकृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।