देहरादून। वर्ष 2027 में उत्तराखंड समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारत निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण एवं तैनाती को लेकर सख्ती शुरू कर दी है। आयोग ने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्य सचिवों तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को दिशा-निर्देश भेजे हैं। इनके तहत चुनाव प्रक्रिया से सीधे जुड़े अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनात नहीं रखा जाएगा। साथ ही, लंबे समय से एक ही जिले में सेवाएं दे रहे अधिकारियों की तैनाती की निर्धारित मानकों के अनुसार समीक्षा की जाएगी।
निर्वाचन आयोग ने 27 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में स्पष्ट किया है कि स्थानांतरण संबंधी निर्देश केवल जिला निर्वाचन अधिकारियों या निर्वाचन अधिकारियों तक सीमित नहीं रहेंगे। चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां निभाने वाले विभिन्न स्तरों के प्रशासनिक, पुलिस, आबकारी और परिवहन विभाग के संबंधित अधिकारी भी इनके दायरे में आएंगे।
प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की होगी समीक्षा
आयोग के निर्देश जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचन अधिकारी, सहायक निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी पर लागू होंगे। इनके अलावा अपर जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी, समकक्ष अधिकारी, संयुक्त कलेक्टर, तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी भी निर्धारित प्रावधानों के दायरे में होंगे।
संभागीय आयुक्त, नगर आयुक्त तथा नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में चुनाव संबंधी जिम्मेदारियां निभाने वाले संबंधित अधिकारियों को भी इन निर्देशों का पालन करना होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अधिकारियों की तैनाती केवल उनके पदनाम के आधार पर तय नहीं होगी, बल्कि चुनावी जिम्मेदारी की प्रकृति को भी ध्यान में रखा जाएगा।
पुलिस अधिकारियों के तबादलों के लिए भी नियम
निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस बल की तैनाती के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को भी दिशा-निर्देशों में शामिल किया है। इनमें रेंज स्तर के अधिकारी, पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारी, पुलिस महानिरीक्षक, उपमहानिरीक्षक, पुलिस आयुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपायुक्त, सहायक पुलिस आयुक्त और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित अन्य संबंधित अधिकारी शामिल हैं।
राज्य सशस्त्र पुलिस के कमांडेंट, पुलिस निरीक्षक, रिजर्व निरीक्षक और समकक्ष अधिकारी भी इन नियमों के दायरे में आएंगे, बशर्ते वे जिले में चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था या पुलिस बल की तैनाती के लिए जिम्मेदार हों। पुलिस विभाग के कंप्यूटरीकरण, विशेष शाखा और प्रशिक्षण जैसे कार्यात्मक विभागों में तैनात अधिकारियों को इन निर्देशों से अलग रखा गया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित कैडर के पदों पर उसी कैडर के अधिकारियों की तैनाती होनी चाहिए और इस नियम में छूट नहीं दी जाएगी।
उपनिरीक्षकों की तैनाती पर अलग प्रावधान
पुलिस उपनिरीक्षक या समकक्ष स्तर के अधिकारियों के लिए आयोग ने अलग व्यवस्था निर्धारित की है। ऐसे अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनात नहीं किया जाएगा। यदि किसी उपनिरीक्षक ने किसी पुलिस उपमंडल में चार वर्ष की अवधि के दौरान तीन साल की सेवा पूरी कर ली है या निर्धारित कटऑफ तारीख तक पूरी करने वाला है, तो उसका स्थानांतरण किया जाना चाहिए।
ऐसे अधिकारी को दूसरे पुलिस उपमंडल में तैनात किया जा सकता है, जो उसी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत न आता हो। यदि जिले का आकार छोटा होने के कारण ऐसा करना संभव नहीं है, तो अधिकारी को जिले से बाहर स्थानांतरित करने का प्रावधान है।
आबकारी और परिवहन विभाग भी दायरे में
आयोग ने आबकारी विभाग में उपनिरीक्षक या उससे ऊपर के स्तर के संबंधित अधिकारियों को भी निर्देशों के दायरे में रखा है। परिवहन विभाग में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, जिला परिवहन अधिकारी, सहायक जिला परिवहन अधिकारी तथा क्षेत्र में कार्यरत उपनिरीक्षक या समकक्ष स्तर से ऊपर के संबंधित अधिकारियों को भी इन प्रावधानों का पालन करना होगा।
चुनावी काम में लापरवाही करने वालों को नहीं मिलेगी जिम्मेदारी
निर्वाचन आयोग ने उन अधिकारियों को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं, जिनके खिलाफ पिछले चुनावों में लापरवाही या अन्य अनियमितताओं के मामलों में कार्रवाई की गई थी। जिन अधिकारियों के विरुद्ध आयोग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है और वह लंबित है, या जिन्हें चुनाव संबंधी काम में लापरवाही के लिए दंडित किया जा चुका है, उन्हें चुनाव से जुड़ी जिम्मेदारी नहीं सौंपी जानी चाहिए।
इसके साथ ही, यदि किसी अधिकारी के आधिकारिक कामकाज से संबंधित आपराधिक मामला अदालत में लंबित है, तो उसे भी चुनाव संबंधी जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए। संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित अधिकारियों का रिकॉर्ड रखने को कहा गया है।
सेवानिवृत्ति के करीब अधिकारियों को छूट
निर्वाचन आयोग ने सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके अधिकारियों के लिए भी छूट का प्रावधान किया है। इसके तहत गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तराखंड में 31 मार्च 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को निर्धारित स्थानांतरण निर्देशों से छूट दी जाएगी। वहीं, उत्तर प्रदेश में 31 मई 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को यह छूट मिलेगी।
इन दिशा-निर्देशों के जरिए आयोग ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की निष्पक्षता, विश्वसनीयता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।