गैरसैंण (भराड़ीसैंण)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को गैरसैंण में प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार के विकास कार्यों और उपलब्धियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प वर्ष 2047 तक उत्तराखंड को विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाना है। इसी लक्ष्य के अनुरूप विकास कार्यों को गति देने और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट भी इसी सोच के साथ तैयार किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के करीब 26 वर्षों में उत्तराखंड ने विकास की लंबी यात्रा तय की है। यह राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष, प्रदेशवासियों की मेहनत और जनभागीदारी का परिणाम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प में उत्तराखंड भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि का दावा
मुख्यमंत्री ने राज्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि वर्ष 2022 में उत्तराखंड का सकल राज्य घरेलू उत्पाद लगभग 2.55 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्तीय वर्ष 2026-27 में बढ़कर करीब 3.82 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इसी अवधि में प्रति व्यक्ति आय लगभग 1.95 लाख रुपये से बढ़कर 2.74 लाख रुपये तक पहुंची है।
उन्होंने बताया कि राज्य में बहुआयामी गरीबी में कमी आई है। स्टार्टअप की संख्या 702 से बढ़कर 1,978 हो गई है, जबकि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की संख्या करीब 60 हजार से बढ़कर एक लाख तक पहुंची है। सौर ऊर्जा क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
धामी ने कहा कि नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य भारत सूचकांक 2023-24 में उत्तराखंड ने 79 अंक हासिल कर संयुक्त रूप से देश में पहला स्थान प्राप्त किया। निवेश अनुकूलता और वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में भी राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।
7,844 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट में विकास कार्यों को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में 7,844.18 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें 4,164.32 करोड़ रुपये पूंजीगत मद और 3,679.86 करोड़ रुपये राजस्व मद के लिए रखे गए हैं।
छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुसार, स्थानीय निकायों की राज्य के कर राजस्व में हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे ग्रामीण और शहरी निकायों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
किसानों की खरीद से लेकर कुंभ की तैयारियों तक प्रावधान
किसानों से धान और गेहूं की खरीद के लिए अन्नपूर्ति योजना के तहत 1,100 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। आधारभूत ढांचे के विकास के लिए विशेष सहायता योजना के अंतर्गत 500 करोड़ रुपये और जल जीवन मिशन के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना के लिए 122 करोड़ रुपये तथा आगामी दिव्य कुंभ की व्यवस्थाओं और बुनियादी सुविधाओं के लिए करीब 290 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। नंदा राजजात यात्रा और हरिद्वार-गंगा गलियारे से जुड़े कार्यों को भी बजट में शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये
स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए अटल आयुष्मान योजना में 100 करोड़ रुपये और राज्य कर्मचारियों की गोल्डन कार्ड योजना के लिए 125 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेजों सहित चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कार्यों के लिए करीब 160 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।
विद्यालयी और उच्च शिक्षा में डिजिटल शिक्षा सुविधाओं के विस्तार के लिए 200 करोड़ रुपये रखे गए हैं। मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना के तहत विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता देने के साथ खेल विश्वविद्यालय, महिला खेल महाविद्यालय, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए भी बजट में प्रावधान किए गए हैं।
महिला एवं बाल कल्याण, पोषण अभियान, भोजन माताओं के मानदेय, किसान पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी प्राथमिकता दी गई है।
बजट निर्माण में जनभागीदारी पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का ध्यान केवल नई योजनाएं शुरू करने पर नहीं, बल्कि उनका लाभ समय पर जनता तक पहुंचाने पर भी है। इसी उद्देश्य से पिछले पांच वर्षों में बजट पूर्व संवाद आयोजित किए गए, जिनमें किसानों, महिलाओं, युवाओं, उद्यमियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए गए।
उन्होंने कहा कि सरकार राजस्व अधिशेष की स्थिति बनाए रखते हुए वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के बेहतर उपयोग पर जोर दे रही है।
आपदा रोधी ढांचे और रोजगार के अवसरों पर ध्यान
धामी ने कहा कि राज्य में आपदा प्रबंधन और सुरक्षित बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जोशीमठ सहित भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों, आपदा रोधी निर्माण, सड़क और हेली सेवाओं से जुड़ी सुविधाओं पर काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, देहरादून में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया का परिसर भी स्थापित किया गया है। इससे सूचना प्रौद्योगिकी और नवाचार से जुड़े क्षेत्रों में युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता विकास के साथ राज्य की विरासत और संस्कृति का संरक्षण करना भी है। वर्ष 2035 तक समृद्ध उत्तराखंड के निर्माण के लक्ष्य के साथ गुणवत्तापूर्ण निवेश, स्थानीय रोजगार, बेहतर सेवाओं और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान दिया जा रहा है।