देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जिसमें बयान देते हुए कहा कि अंकिता के माता-पिता की मांग पर सरकार किसी भी जांच को कराने के लिए तैयार है. उनके इस बयान के बाद उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि मुख्यमंत्री का यह बयान संवेदना नहीं बल्कि जिम्मेदारी से बचने की कोशिश है.
गणेश गोदियाल ने कहा कि, अंकिता मामले को लेकर अभिनेत्री और भाजपा के पूर्व विधायक की कथित पत्नी उर्मिला सनावर की तरफ से सनसनीखेज खुलासे को आज 15 दिन से अधिक हो गए हैं और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी ने इतने दिनों बाद अंकिता हत्याकांड पर आज कुछ बोला है. इससे यह पता चलता है कि उत्तराखंड की जनता के लिए उनकी नजर में क्या महत्व है.
गोदियाल ने कहा कि, सीएम धामी का यह कहना कि हम किसी भी जांच के लिए तैयार हैं. अगर सरकार सही मायने में अंकिता केस को लेकर हर जांच कराने के लिए तैयार थी तो 3 साल तक सीबीआई जांच से क्यों पीछे हटी? उन्होंने कहा कि, मुख्यमंत्री यह भी कह रहे हैं कि वह अंकिता के माता-पिता से बात करेंगे और वह जो आदेश करेंगे, वही सरकार करेगी. उन्होंने इस बयान को कानून का अपमान बताते हुए कहा कि जांच दरअसल माता-पिता के आदेश से नहीं बल्कि कानून से होती है और मुख्यमंत्री का काम फैसला लेना होता है, जिम्मेदारी से बचना नहीं होता है.
उन्होंने सवाल उठाए कि क्या अब तक सरकार की कोई स्वतंत्र सोच नहीं थी? और क्या 3 साल तक सरकार सोती रही? मुख्यमंत्री यह भी कह रहे हैं कि जो भी कानूनी रूप से संभव होगा, वह सब किया जाएगा तो फिर उन्हें बताना चाहिए कि सीबीआई जांच में कौन से कानून आड़े आ रहे हैं?
गणेश गोदियाल का कहना है कि हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में जांच क्यों असंभव है? हालांकि, सत्यता यह है कि सरकार अब दबाव में आई है? और बयान देने पर मजबूर हुई है. कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने मांग उठाई है कि राज्य सरकार को हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में अंकिता मामले की सीबीआई जांच करानी चाहिए.
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