देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी कंट्रोवर्सी को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. आज बुधवार सात जनवरी को कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय देहरादून में पीसीसी चीफ गणेश गोदियाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड व वीआईपी कंट्रोवर्सी को लेकर सरकार पर कई सवाल खड़े किए हैं. गणेश गोदियाल ने यहां तक कहा है कि भाजपा के केंद्रीय नेताओं को प्रदेश नेतृत्व को बदलना पड़ेगा, नहीं तो इस मामले की जांच प्रभावित होती रहेगी.
गणेश गोदियाल ने कहना कि उन्हें लगता है कि मंगलवार 6 जनवरी को अंकिता भंडारी हत्याकांड में किसी पत्रकार के पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री पर ने जो कहा, उससे सीएम काफी असहज नजर आए. उन्हें असहजता इसलिए हो रही थी कि अंकिता केस में वह पहले दिन से ही इस मामले को डायवर्ट और प्रभावित कर रहे हैं. साथ ही सबूतों को मिटाए जाने का काम किया जा रहा है. इसलिए उनका पत्रकार की ओर से पूछे गए प्रश्न का जवाब देने का तरीका असहजता पूर्ण रहा.
गणेश गोदियाल ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड पर उन्होंने कई लोक सेवकों के माध्यम से सरकार के स्पष्टीकरण से असंतुष्ट होकर कुछ प्रश्न पूछे थे. इसको लेकर उन्होंने एक प्रश्नावली हाल में पुलिस अधिकारी को भी सौंपी थी, जिनका उत्तर उन्हें आज तक नहीं मिला है.
गणेश गोदियाल के सवाल: क्या एसआईटी ने इस दिशा में जांच की थी कि मुख्यमंत्री के आदेश पर रिजॉर्ट के कमरे को तोड़ने का काम किया गया? क्या एसआईटी ने उनसे इस विषय पर पूछताछ की है, क्योंकि पूरे मर्डर मिस्ट्री की गुत्थी उसी कमरे के इर्द-गिर्द घूमती है. यमकेश्वर विधायक खुलेआम यह स्वीकार कर चुकी हैं और मुख्यमंत्री को इसका श्रेय भी दे चुकी हैं कि रिजॉर्ट को सीएम के आदेशों से ध्वस्त किया गया था.
सीएम धामी से मांगा जवाब: गणेश गोदियाल ने कहा कि जब तक उस कमरे को बुलडोजर से तुड़वाने के आदेश देने वाले व्यक्ति के मंसूबों का पता नहीं चलता है, तब तक अंकिता हत्याकांड की गुत्थी नहीं सुलझ सकती है. प्रदेश का मुख्यमंत्री होने के नाते अगर वह इसको स्वीकार करते हैं कि उन्होंने यह आदेश दिए थे और उस आदेश को देने के पीछे क्या कुछ मंशा थी, तो वह इसको उजागर कर सकते हैं.
गणेश गोदियाल ने आशंका जताई कि सत्ता में बैठे लोग कदम-कदम पर इस जांच को भटकाने का काम करेंगे. इसलिए सत्ता में बैठे होने तक यह जांच किसी भी सूरत में अंजाम तक नहीं पहुंच सकती है. उन्होंने सवाल उठाया कि एसआईटी जांच में 90 से ऊपर गवाह बनाए गए थे, लेकिन कितनों की गवाही हुई है, इसका जवाब भी मुख्यमंत्री को देना चाहिए, लेकिन इन उत्तरों को देने की बजाय मुख्यमंत्री बात को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं.
गणेश गोदियाल ने बीजेपी के बयानों पर घोर आपत्ति जताते हुए कहा कि विपक्ष को साक्ष्य दिखाने को कहा जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है. उनका कहना है कि राज्य की सत्ता में बैठे लोगों से परिणाम की अपेक्षा नहीं की जा सकती है. इसलिए भाजपा के केंद्रीय नेताओं को प्रदेश नेतृत्व को बदलना पड़ेगा, नहीं तो इस मामले की जांच प्रभावित होती रहेगी. ऐसे में आज नहीं तो एक माह बाद हर हालत में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को निश्चित रूप से प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन करना पड़ेगा. उन्होंने इस दौरान इस मामले की तत्काल हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की देखरेख में सीबीआई जांच कराए जाने की मांग उठाई है.
Users Today : 11