देहरादून: उत्तराखंड पुलिस को दो महत्वपूर्ण उपलब्धियों से सराहा गया है. जिसमें आईसीजेएस (Inter-Operable Criminal Justice System) 2.0 रैंकिंग में प्रथम स्थान और प्रयागराज महाकुंभ 2025 में उत्तराखंड एसडीआरएफ की सराहनीय भूमिका रही है. आईसीजेएस की मासिक रैंकिंग में उत्तराखंड पुलिस ने रैंकिंग में देश में प्रथम स्थान हासिल किया है.
उत्तराखंड पुलिस ने एक बार फिर डिजिटल पुलिसिंग और न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण में अपनी अग्रणी भूमिका साबित की है. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा प्रकाशित CCTNS / ICJS प्रगति डैशबोर्ड रिपोर्ट की मासिक रैंकिंग में उत्तराखंड पुलिस ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है. यह उपलब्धि राज्य पुलिस की तकनीकी दक्षता, तेजी से नई प्रणालियों को अपनाने की क्षमता और प्रदेश के सभी जिलों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा आईसीजेएस 2.0 को साल 2026 तक पूरी तरह से लागू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके अंतर्गत राज्यों को पुलिस, न्यायालय, अभियोजन, जेल, फॉरेंसिक और फिंगरप्रिंट डेटाबेस को एक साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ना है. उत्तराखंड ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए अधिकांश मॉड्यूल्स का समय से पहले एकीकरण पूरा कर लिया है.
वर्तमान में जारी की गई आईसीजेएस 2.0 रैंकिंग में उत्तराखंड को 93.46 अंक प्राप्त हुए हैं. इस रैंकिंग में हरियाणा 93.43 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरे और असम 93.16 प्रतिशत अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. ICJS 2.0 के कार्यान्वयन के माध्यम से सभी जिलों में इसके प्रमुख मॉड्यूल्स को सफलतापूर्वक एकीकृत किया है. जिससे केस डायरी, चार्जशीट, डिजिटल साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रियाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समन्वित हो सकी हैं. पुलिस अधिकारियों के प्रशिक्षण ने जांच और अभियोजन कार्य को गति दी है. साथ ही “One Data, One Entry” की अवधारणा के तहत सीसीटीएनएस, e-Courts, e-Prisons समेत अलग-अलग प्रणालियों का सुदृढ़ समन्वय स्थापित किया गया है.
प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ के मध्य सुरक्षित, सुव्यवस्थित और निर्बाध संचालन करने के लिए उत्तर प्रदेश शासन के विशेष आग्रह पर उत्तराखंड एसडीआरएफ की एक कंपनी को महाकुंभ ड्यूटी हेतु तैनात किया गया. सेनानायक एसडीआरएफ के नेतृत्व में 112 सदस्यीय एसडीआरएफ दल द्वारा 24 जनवरी से 27 फरवरी तक संगम नोज सहित अन्य अति संवेदनशील क्षेत्रों में वाटर रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार, लापता श्रद्धालुओं की सहायता, समन्वित रेस्क्यू कार्यों और अन्य आवश्यक सेवाओं में पूर्ण निष्ठा, अनुशासन, समर्पण और तत्परता के साथ उत्कृष्ट ड्यूटी का निर्वहन किया गया.
एसडीआरएफ द्वारा प्रदर्शित इस सेवा और सराहनीय योगदान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एसडीआरएफ उत्तराखंड के सभी अधिकारियों और जवानों को मेडल और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया. इस उपलब्धि पर डीजीपी ने सीसीटीएनएस टीम समेत उत्तराखंड पुलिस के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता सामूहिक प्रयास, तकनीकी नवाचार और सतत मॉनिटरिंग का परिणाम है.
उन्होंने कहा कि आईसीजेएस 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन से जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और साक्ष्य-आधारित होगी, जिससे न्याय प्रणाली को नई गति मिलेगी. उत्तराखंड पुलिस द्वारा आईसीजेएस 2.0 के उन्नत मॉड्यूल्स के व्यापक उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे राज्य में डिजिटल न्याय प्रणाली और अधिक सुदृढ़ होगी. वहीं प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान उत्तराखंड एसडीआरएफ ने प्रदर्शित उत्कृष्ट, अनुशासित और समर्पित सेवाओं की सराहना करते हुए डीजीपी ने एसडीआरएफ के सभी अधिकारियों और जवानों को हार्दिक बधाई दी.
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