February 10, 2026 6:47 pm

मुख्यमंत्री ने बीते 4 साल में परिवार के लिए एक भी दिन नहीं निकाला, उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में भावुक हुईं पत्नी गीता

देहरादून: शहर के परेड ग्राउंड में पहली बार आयोजित उत्तरायणी कौथिक महोत्सव ने राजधानी को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया. सेवा संकल्प फाउंडेशन की ओर से आयोजित चार दिवसीय इस महोत्सव में उत्तराखंड के हर अंचल की लोक परंपराएं गीत संगीत और सांस्कृतिक झलक एक ही मंच पर देखने को मिली. बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने आयोजन को ऐतिहासिक बताया.

महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और खास बना दिया. इस दौरान मुख्यमंत्री की पत्नी गीता धामी ने मंच से जनता को संबोधित किया. संबोधन के दौरान मातृशक्ति की भूमिका पर अपना वक्तव्य देते हुए भावुक हो गईं. उनकी आंखों में छलकते भावों ने पूरे पंडाल को गंभीर और भावनात्मक बना दिया.

गीता धामी ने अपने संबोधन में देश की कई वीरांगनाओं और माताओं के त्याग का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि, किसी भी सफल व्यक्ति के पीछे मां और परिवार का बड़ा योगदान होता है. उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की माता विशना देवी का उदाहरण देते हुए कहा कि,

अगर उन्होंने परिवार को संभालने की जिम्मेदारी न निभाई होती तो आज पुष्कर सिंह धामी इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते. उन्होंने प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में पुष्कर सिंह धामी ने बीते चार वर्षों में परिवार के लिए एक दिन भी नहीं निकाला. वह लगातार प्रदेश की सेवा में जुटे रहे.

गीता धामी ने आगे कहा कि,

मुख्यमंत्री ने कठिन फैसले लेने से कभी परहेज नहीं किया. युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नकल विरोधी कानून बनाया गया और 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गईं. इसके बावजूद उन पर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है.
गीता धामी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पत्नी-

गीता धामी ने समान नागरिक संहिता (UCC) और लिवइन रिलेशनशिप को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर भी खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि,

कुछ लोग यह आरोप लगा रहे हैं कि मुख्यमंत्री ने धर्म के खिलाफ जाकर यूसीसी लागू किया और लिव इन रिलेशनशिप को मान्यता दी. जबकि सच्चाई यह है कि लिव-इन रिलेशनशिप को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पहले ही मान्यता दे चुके हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोई नई व्यवस्था नहीं दी, बल्कि पहले से मौजूद व्यवस्था के लिए केवल नियम तय किए.
गीता धामी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पत्नी-

अपने संबोधन में गीता धामी ने कहा कि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को आज प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में धर्म रक्षक के रूप में जाना जाता है. उनकी नीतियों और योजनाओं से प्रदेश की महिलाएं और बहनें सशक्त हो रही हैं. स्वयं सहायता समूहों से लेकर सामाजिक योजनाओं तक महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है.

इसके बावजूद कुछ लोग लगातार भ्रम फैलाने और झूठे आरोप लगाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश की जनता सच्चाई को भली भांति समझती है. गीता धामी का यह भावनात्मक संबोधन कार्यक्रम की सबसे चर्चित और यादगार झलक बन गया जिसने उत्तरायणी कौथिक के समापन को खास बना.