February 26, 2026 1:41 pm

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक, CS ने की आपदा मोचक एवं न्यूनीकरण निधि के प्रस्तावों की समीक्षा

देहरादून: मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य आपदा मोचक निधि तथा राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि के अंतर्गत प्राप्त प्रस्तावों और आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों की वित्तीय एवं भौतिक प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।

बजट उपयोग में दोहराव न हो

मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन के तहत विभागों को सीधे उपलब्ध कराए गए बजट और जिलाधिकारियों के माध्यम से जनपदों को आवंटित बजट के व्यय में किसी भी प्रकार की दोहराव की स्थिति नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में विभागों तथा जिलाधिकारियों को दिए गए बजट के समन्वित और प्रभावी क्रियान्वयन का विस्तृत विवरण संबंधित विभागाध्यक्ष एवं जिला अधिकारी प्रस्तुत करें।

सिविल संरचना के साथ हरित कार्यों को भी प्राथमिकता

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि सुरक्षात्मक एवं शमन कार्यों में केवल सिविल संरचनाओं तक सीमित न रहकर पौधरोपण एवं हरित समर्थन कार्यों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। इससे समय के साथ प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र विकसित होगा और पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा।

सुरक्षात्मक कार्यों की टिकाऊ अवधि सुनिश्चित करने के निर्देश

बैठक में सिंचाई विभाग, पेयजल निगम, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग सहित अन्य संबंधित कार्यदायी संस्थाओं से सुरक्षात्मक कार्यों की टिकाऊ अवधि के बारे में जानकारी ली गई।

सिंचाई विभाग ने अवगत कराया कि आपदा प्रबंधन के अंतर्गत किए जा रहे सुरक्षा कार्यों की औसत टिकाऊ अवधि लगभग 25 वर्ष तक रहती है।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी सुरक्षात्मक कार्य न्यूनतम निर्धारित अवधि तक टिकाऊ बने रहें। इसके लिए कार्यों को गंभीरता, पारदर्शिता और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप संपादित किया जाए।

अग्रिम प्रस्तावों का भी अवलोकन

बैठक में चालू वर्ष में किए गए सुरक्षात्मक कार्यों की प्रगति की जानकारी ली गई तथा भविष्य में प्रस्तावित सुरक्षात्मक कार्यों का भी अवलोकन किया गया।

बैठक में सचिव विनोद कुमार सुमन, युगल किशोर पंत, एस. ए. अदनकी, अपर सचिव विनीत कुमार, नवनीत पांडेय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और दीर्घकालिक बनाने पर विशेष जोर दिया गया।