देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहां गरिमा, संयम और तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़े सख्त नकल विरोधी कानून जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सार्थक बहस करने के बजाय असंसदीय भाषा का प्रयोग करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद में “इडियट” और “अंधभक्त” जैसे शब्दों का इस्तेमाल संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। ऐसे शब्द न केवल सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि जनता के जनादेश का भी अनादर करते हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष की जिम्मेदारी सरकार से तथ्यों के आधार पर सवाल पूछने और रचनात्मक सुझाव देने की होती है। व्यक्तिगत कटाक्ष और अभद्र भाषा किसी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि की पहचान नहीं हो सकती। लोकतंत्र में स्वस्थ संवाद और मर्यादित बहस की परंपरा को बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों का दायित्व है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया सख्त नकल विरोधी कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और युवाओं के हितों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि ऐसे गंभीर विषय पर चर्चा करने के बजाय विषयांतर कर असंसदीय भाषा का प्रयोग करना उचित नहीं है।
उन्होंने विश्वास जताया कि देश की जनता लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान करने वालों और उनका उल्लंघन करने वालों के बीच अंतर अच्छी तरह समझती है तथा लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता ही करती है।