देहरादून। उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण में करीब 19 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची में पाई गई त्रुटियों को दूर करने के लिए भेजे गए नोटिस को लेकर कांग्रेस ने सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं, जबकि राज्य सरकार ने इसे मतदाता सूची के शुद्धिकरण की सामान्य प्रक्रिया बताया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, 8 जून से 7 जुलाई तक चले पहले चरण के बाद जारी प्रारूप मतदाता सूची में कुल 71.33 लाख मतदाताओं में से 19,04,380 मतदाताओं के अभिलेखों में विभिन्न प्रकार की विसंगतियां मिली हैं। इन्हीं त्रुटियों के सत्यापन और सुधार के लिए संबंधित मतदाताओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं। सुनवाई के लिए न्याय पंचायत, तहसील, नगर निगम, नगर पंचायत और वार्ड स्तर पर विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे।
निर्वाचन आयोग के मुताबिक नोटिस जारी करने के प्रमुख कारणों में आयु संबंधी विसंगति, पारिवारिक विवरण में त्रुटि, नामों में गलती, एक ही परिवार में असामान्य प्रविष्टियां और पूर्व सूची में अनमैप्ड रिकॉर्ड शामिल हैं।
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी का आरोप है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस भेजकर उन्हें भय का माहौल दिखाया जा रहा है, जिससे वे अपने मताधिकार का उपयोग करने से पीछे हटें। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रभाव डालने का प्रयास बताया है।
वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण निर्वाचन आयोग की नियमित प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग पात्र नहीं हैं, जिनके नाम गलत तरीके से दर्ज हैं या जो अब संबंधित क्षेत्र के निवासी नहीं हैं, उनकी जांच कर सूची को अद्यतन किया जाता है। इसमें किसी प्रकार की राजनीति नहीं है।
निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि नोटिस मिलने पर निर्धारित समय के भीतर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर अपनी जानकारी का सत्यापन कराएं, ताकि उनका नाम मतदाता सूची में सही रूप से दर्ज रह सके।