देहरादून। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सचिवालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने प्रदेशवासियों और सचिवालय परिवार को शुभकामनाएं देते हुए स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी का स्मरण कराने वाला अवसर है।
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड के 25 वर्षों की यात्रा में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, पर्यटन और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, लेकिन पलायन, रोजगार, दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं शिक्षा, आपदा जोखिम और हिमालयी पर्यावरण संरक्षण जैसी चुनौतियों पर अभी लगातार काम करने की जरूरत है।
उन्होंने ‘विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखण्ड’ का लक्ष्य सामने रखते हुए कहा कि ऐसा उत्तराखण्ड बनाया जाना चाहिए जहां पहाड़ का युवा अपने गांव में ही सम्मानजनक रोजगार पा सके, महिलाएं आत्मनिर्भर हों और हर नागरिक को बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों और कर्मचारियों से सुशासन और परिणाम आधारित प्रशासन पर जोर देते हुए कहा कि प्रशासन को केवल फाइलों तक सीमित न रखकर वास्तविक परिणाम देने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल शासन और आंकड़ा विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी जोर दिया।
उन्होंने स्थानीय अर्थव्यवस्था और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताते हुए मोटे अनाज, स्थानीय कृषि उत्पाद, बागवानी, औषधीय पौधों, हस्तशिल्प और जैविक उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर जोर दिया। युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में काम करने की बात कही।
मुख्य सचिव ने हिमालय और पर्यावरण संरक्षण को विकास का अभिन्न हिस्सा बताते हुए आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी प्रणाली, मजबूत आधारभूत ढांचे और हिमालय के अनुकूल विकास मॉडल पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने पर्यटन को जिम्मेदार, टिकाऊ और उच्च मूल्य वाले पर्यटन की दिशा में विकसित करने की आवश्यकता बताई।
अंत में मुख्य सचिव ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता, नवाचार और संवेदनशीलता को कार्यसंस्कृति का आधार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक निर्णय उत्तराखण्ड के हित में, प्रत्येक प्रयास जनहित में और प्रत्येक कार्य विकसित उत्तराखण्ड की दिशा में होना चाहिए।