September 12, 2026 7:23 pm

कांग्रेस के दो पद छोड़ना चाहते हैं हरीश रावत ?  सोशल मीडिया पोस्ट में छलका दर्द…

देहरादून। प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस में अपने दो पदों से अलग होने की इच्छा जताई है। हालांकि, उन्होंने अभी औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है। रावत ने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे संघर्ष पर कोई सवाल उठे। उन्होंने यह बात सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कही।

हरीश रावत कांग्रेस कार्यसमिति के आमंत्रित सदस्य और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य हैं। उन्होंने इन दोनों पदों से हटने की इच्छा जताई है। यह घटनाक्रम उनके सहयोगी चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के एक दिन बाद सामने आया है।

प्रवर्तन निदेशालय ने 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े धनशोधन मामले में देहरादून में कई स्थानों पर छापेमारी की थी। इनमें चंदन सिंह जीना का आवास भी शामिल था। एजेंसी के अनुसार, तलाशी के दौरान 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी, करीब 200.5 ग्राम सोना और 12 महंगी घड़ियां बरामद हुईं। जीना और उनके परिवार के बैंक खातों में मौजूद 52.16 लाख रुपये भी फ्रीज किए गए हैं। चंदन सिंह जीना रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल में विशेष कार्याधिकारी रह चुके हैं और वर्तमान में उनके निजी सहायक के तौर पर काम कर रहे हैं।

रावत बोले- जांच के बाद सामने आएगा सच

हरीश रावत ने कहा कि उनके सहयोगी के घर से नकदी और जेवर बरामद होने के जो दावे सामने आ रहे हैं, उनकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। उन्होंने चंदन सिंह जीना को अपना पुराना सहयोगी बताते हुए कहा कि यदि भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप साबित होते हैं तो यह उनके लिए शर्मिंदगी की बात होगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें इन आरोपों पर विश्वास नहीं है।

रावत ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव से पहले माहौल बिगाड़ने और नया राजनीतिक विमर्श तैयार करने के लिए उनके बजाय उनके सहयोगी के ठिकाने पर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि पार्टी की साख और भ्रष्टाचार के खिलाफ उसके संघर्ष पर कोई सवाल न उठे, इसलिए वह कांग्रेस कार्यसमिति और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के दोनों पदों से अलग होना चाहते हैं।

भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी दी सफाई

अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए रावत ने कहा कि उनके तीन साल के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्ती निकाली गई थी। उन्होंने कहा कि नियुक्तियों की प्रक्रिया में यदि अनजाने में भी कोई चूक हुई हो तो वह इसके लिए प्रदेश के लोगों से माफी मांगते हैं।

रावत ने भर्ती आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर कहा कि शिकायत सामने आने के बाद संबंधित अधिकारी को हटा दिया गया था। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पुराने सेवा रिकॉर्ड और योग्यता के आधार पर की गई थी। इस फैसले में पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी की सलाह का भी उन्होंने उल्लेख किया।

2016 की भर्ती परीक्षा मामले में जांच जारी

प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी है। एजेंसी ने तत्कालीन उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष, सचिव, परीक्षा नियंत्रक, उत्तर पुस्तिका प्रसंस्करण करने वाली निजी कंप्यूटर एजेंसी के मालिक और कुछ बिचौलियों के ठिकानों पर भी तलाशी ली।

एजेंसी के अनुसार, परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं में कथित तौर पर बदलाव किए गए और कुछ अभ्यर्थियों से संबंधित जानकारी निजी लोगों तक पहुंचाई गई। इसके बाद उत्तरों में कथित हेरफेर किए जाने का आरोप है। मामले में नकदी के लेनदेन की भी जांच की जा रही है। चंदन सिंह जीना का मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है, जिसकी तकनीकी जांच कराई जाएगी।

रावत की जांच एजेंसियों को खुली चुनौती

हरीश रावत ने कहा कि यदि किसी के पास सरकारी नियुक्तियों में उनके हस्तक्षेप से संबंधित कोई प्रमाण है तो उसे सीधे केंद्रीय जांच एजेंसी, प्रवर्तन निदेशालय या पुलिस को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जाने-अनजाने उनसे ऐसी कोई चूक हुई है, जिससे युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ा हो तो वह इसके लिए माफी मांगने को तैयार हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि कोई गलती साबित होती है तो कानून जो भी सजा देगा, वह उसे भुगतने के लिए तैयार हैं।