September 22, 2026 6:47 pm

एससी-एसटी अत्याचार मामलों के निस्तारण में देरी पर धामी सख्त, तय समय में कार्रवाई के निर्देश

देहरादून। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को लंबित मामलों की समीक्षा कर तय समय-सीमा में निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा, सम्मान और उसका अधिकार मिलना चाहिए। वर्ष 2024 से अब तक लंबित मामलों की जांच में देरी के कारणों की समीक्षा करते हुए गंभीर और पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने को कहा गया। पुलिस, प्रशासन और अभियोजन विभाग को आपसी समन्वय से प्रभावी कार्रवाई करने तथा विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा के निर्देश दिए गए।

धामी ने कहा कि पीड़ितों को अनुमन्य राहत राशि के भुगतान में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। जिन मामलों में राहत देने में विलंब हुआ है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए। प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा और पुनर्वास जैसी सुविधाओं से भी जोड़ा जाए। गंभीर मामलों में पीड़ित और उसके परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने अधिनियम से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए जिलों में वरिष्ठ स्तर पर जवाबदेही तय करने और पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को अधिनियम के प्रावधानों तथा संवेदनशील मामलों की विवेचना को लेकर नियमित प्रशिक्षण देने को कहा। समाज कल्याण, पुलिस और अभियोजन विभाग को समय-समय पर प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में मामलों की विवेचना, न्यायालयीन स्थिति, राहत राशि और अन्य सहायता की शासन स्तर से निगरानी के लिए डिजिटल निगरानी व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में अधिनियम के प्रावधानों, कानूनी अधिकारों और पीड़ितों को मिलने वाली सहायता को लेकर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए।

2024 में 189 और 2025 में 157 मुकदमे

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024 में अधिनियम के तहत 189, वर्ष 2025 में 157 और वर्ष 2026 में 15 सितंबर तक 116 मुकदमे दर्ज हुए। वर्ष 2026 में दर्ज मामलों में 25 मामले विवेचनाधीन हैं।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में 205 पीड़ितों को 228.71 लाख रुपये, 2025-26 में 127 पीड़ितों को 143.16 लाख रुपये और वित्तीय वर्ष 2026-27 में 18 सितंबर तक 104 पीड़ितों को 99.528 लाख रुपये की सहायता दी गई। बैठक में यह भी बताया गया कि मुख्य सचिव और जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में जिला स्तर पर संबंधित मामलों की नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं।