March 1, 2026 2:28 pm

चारधाम यात्रा से पहले उत्तराखंड में तीन दिवसीय मॉक ड्रिल, 13 जिलों में आपदा प्रबंधन की होगी बड़ी परीक्षा

देहरादून। आगामी चारधाम यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए उत्तराखंड सरकार ने आपदा प्रबंधन तंत्र को और सशक्त बनाने की तैयारी तेज कर दी है। राज्य के सभी 13 जनपदों में 16, 17 और 18 मार्च 2026 को व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी।

इस संबंध में सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी जिलों के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

जिला ही नहीं, तहसील स्तर पर भी अभ्यास

बैठक में निर्णय लिया गया कि मॉक ड्रिल केवल जिला मुख्यालयों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विभिन्न तहसील स्तरों पर भी कराई जाएगी। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की वास्तविक स्थिति का आकलन करना और स्थानीय संसाधनों की प्रभावशीलता की जांच करना है।

सभी जिलों ने संभावित आपदा परिदृश्यों और चयनित स्थलों की जानकारी प्रस्तुत की।

यूएसडीएमए करेगा निगरानी

पूरे अभ्यास की मॉनिटरिंग उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) द्वारा की जाएगी। सचिव विनोद कुमार सुमन ने निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप आयोजित किया जाए, ताकि कमियों की सही पहचान कर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।

उन्होंने कहा कि यूएसडीएमए अब स्वयं सफलतापूर्वक मॉक अभ्यास संचालित करने में सक्षम है और जनपदों को भी इस स्तर तक तैयार किया जा रहा है कि वे अपने संसाधनों के आधार पर नियमित अभ्यास कर सकें।

सरकार का लक्ष्य ‘जीरो डेथ’ की अवधारणा के तहत आपदा के समय त्वरित निर्णय और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।

इन आपदाओं पर होगा अभ्यास

तीन दिवसीय मॉक ड्रिल के दौरान निम्न संभावित परिस्थितियों पर आधारित परिदृश्यों में अभ्यास किया जाएगा—

  • भूकंप
  • वनाग्नि
  • भूस्खलन
  • अग्निकांड
  • जलभराव व बाढ़
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष
  • नाव पलटना
  • बादल फटना
  • जलाशय विस्फोट
  • औद्योगिक दुर्घटना
  • एवलांच
  • भगदड़
  • नदी में डूबने की घटनाएं

इन सभी स्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों की तत्परता, संसाधनों की उपलब्धता, संचार व्यवस्था, चेतावनी प्रणाली तथा विभागीय समन्वय की व्यापक जांच की जाएगी।

कई विभाग रहेंगे शामिल

मॉक ड्रिल में जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, वन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां सक्रिय भूमिका निभाएंगी। उपकरणों की कार्यशीलता और राहत सामग्री की उपलब्धता भी परखी जाएगी।

यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु

चारधाम यात्रा के दौरान राज्य में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया अत्यंत आवश्यक है।

सरकार का प्रयास है कि इस मॉक ड्रिल के माध्यम से संभावित जोखिमों की पहले से पहचान कर प्रभावी रणनीति तैयार की जाए, ताकि यात्रा सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न हो सके।