ऋषिकेश। उत्तराखंड में वर्षों से वन भूमि विवादों और भूमि स्वामित्व की समस्या से जूझ रहे हजारों परिवारों को जल्द राहत मिल सकती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संकेत दिए हैं कि राज्य सरकार ऐसे सभी क्षेत्रों के लिए एक समान (इंटीग्रेटेड) समाधान तैयार कर रही है, जिसे केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
आईडीपीएल मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में वन भूमि और विस्थापन से जुड़ी समस्याएं एक जैसी हैं। इसलिए अलग-अलग समाधान की बजाय एक व्यापक नीति तैयार की जा रही है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को स्थायी राहत मिल सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ऋषिकेश के बापूग्राम की समस्या को स्थानीय विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने प्रमुखता से उनके समक्ष रखा है। इसके अलावा बिंदुखत्ता, बग्गा-54, रामनगर और अन्य प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को भी इस प्रस्ताव में शामिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वन भूमि से जुड़े मामलों में कानूनी और तकनीकी बाधाएं लंबे समय से समाधान में रुकावट बनी हुई हैं। इसी कारण सरकार ऐसा समग्र प्रस्ताव तैयार कर रही है, जिसे केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद लागू किया जाएगा। इससे हजारों परिवारों को भूमि संबंधी अधिकारों के साथ बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का रास्ता साफ होगा।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है और केंद्र सरकार के सहयोग से जल्द सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
ऋषिकेश के बाद मुख्यमंत्री भीमताल पहुंचे, जहां उन्होंने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए राज्य की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता ने लगातार दूसरी बार भाजपा को सत्ता सौंपकर पुरानी राजनीतिक परंपरा को बदला है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन को राज्य के विकास की बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि उनके सहयोग से उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।